NEET-UG ऑनलाइन मोड: सुरक्षित जरूर, लेकिन लागू करना आसान नहीं

NEET-UG को 2027 से ऑनलाइन मोड में कराने की तैयारी को लेकर शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि यह व्यवस्था पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने में मदद कर सकती है, लेकिन इसे लागू करना बेहद जटिल होगा।

NEET-UG भारत की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा है। 2026 में लगभग 23 लाख छात्रों ने परीक्षा दी थी। इतने बड़े स्तर की परीक्षा को ऑनलाइन यानी Computer-Based Test mode में कराना सरकार और NTA के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

20 से अधिक शिफ्ट में हो सकती है परीक्षा

अधिकारियों के अनुसार, यदि NEET-UG को ऑनलाइन मोड में कराया जाता है, तो इतने बड़े छात्र समूह को संभालने के लिए परीक्षा कम से कम 20 सेशन में आयोजित करनी पड़ सकती है। यह प्रक्रिया लगभग 10 दिनों तक चल सकती है।

इसका मतलब है कि सभी छात्रों की परीक्षा एक ही दिन नहीं होगी। अलग-अलग शिफ्ट और अलग-अलग दिनों में परीक्षा करानी पड़ सकती है।

ऑनलाइन परीक्षा क्यों सुरक्षित मानी जा रही है?

Computer-Based Test mode में प्रश्नपत्र की physical handling कम हो जाती है। इससे पेपर लीक का खतरा कम हो सकता है।

ऑनलाइन परीक्षा के कुछ फायदे:

फायदाविवरण
पेपर लीक का खतरा कमOMR और printed paper की physical movement कम होगी
Digital audit trailहर activity का digital record रहेगा
तेज result processingपरिणाम जल्दी तैयार हो सकते हैं
Impersonation controlउम्मीदवार की पहचान की निगरानी बेहतर हो सकती है
Security monitoringपरीक्षा केंद्रों पर digital surveillance संभव होगा

सबसे बड़ी चुनौती: Infrastructure

NEET जैसी परीक्षा को ऑनलाइन कराने के लिए देशभर में बहुत बड़ी व्यवस्था चाहिए।

इसके लिए जरूरी होगा:

जरूरतचुनौती
Computersलाखों छात्रों के लिए पर्याप्त systems
Internetसभी केंद्रों पर stable connectivity
Exam Centresछोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त केंद्र
Cyber Securityhacking और data breach से सुरक्षा
Power Backupबिजली कटौती से बचाव
Technical Staffहर केंद्र पर trained staff

अधिकारियों के अनुसार, NTA को 2027 की परीक्षा के लिए exam centre infrastructure को बड़े स्तर पर expand करना होगा।

ग्रामीण छात्रों के लिए चिंता

2018 में भी NEET को ऑनलाइन मोड में लाने का प्रस्ताव आया था, लेकिन उस समय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस पर आपत्ति जताई थी।

मुख्य चिंता यह थी कि ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को नुकसान हो सकता है, क्योंकि सभी छात्रों के पास कंप्यूटर और इंटरनेट का समान अनुभव नहीं होता।

Digital divide आज भी एक बड़ी चिंता है।

क्या syllabus और pattern बदलेगा?

शुरुआती जानकारी के अनुसार, परीक्षा का syllabus और overall question pattern पहले जैसा ही रहने की संभावना है।

बदलाव मुख्य रूप से परीक्षा के mode में होगा:

अभीप्रस्तावित
Pen & Paper ModeComputer-Based Test
OMR SheetComputer screen पर answers
Single-day examMultiple sessions possible
Printed question paperDigital question paper

Normalisation भी बड़ा मुद्दा होगा

यदि परीक्षा कई दिनों और कई shifts में होगी, तो अलग-अलग शिफ्ट की difficulty level को balance करने के लिए normalisation की जरूरत पड़ेगी।

अधिकारियों के अनुसार, JEE जैसी परीक्षाओं में normalisation पहले से लागू है और उसी आधार पर NEET के लिए भी fair system बनाया जा सकता है।

लेकिन NEET जैसे high-stakes exam में normalisation को लेकर छात्रों और अभिभावकों की चिंता स्वाभाविक होगी।

निष्कर्ष

NEET-UG को ऑनलाइन मोड में लाना पेपर लीक रोकने की दिशा में बड़ा कदम हो सकता है। इससे परीक्षा की सुरक्षा, transparency और monitoring बेहतर हो सकती है।

लेकिन भारत जैसे बड़े और विविध देश में 23 लाख छात्रों के लिए ऑनलाइन NEET कराना आसान नहीं होगा।

सरकार और NTA को यह सुनिश्चित करना होगा कि:

  • ग्रामीण छात्रों को नुकसान न हो
  • exam centres पर्याप्त हों
  • cyber security मजबूत हो
  • normalisation fair हो
  • और छात्रों को पहले से पूरी जानकारी दी जाए

NEET का ऑनलाइन मॉडल सुरक्षित हो सकता है, लेकिन इसे लागू करने के लिए बेहद मजबूत planning और transparent execution की जरूरत होगी।